डॉ सम्पूर्णानन्द का जीवन परिचय हिंदी में | Dr Sampurnanand Biography In Hindi

डॉ सम्पूर्णानन्द का जीवन परिचय हिंदी में | Dr Sampurnanand Biography In Hindi

परिचय

डॉ सम्पूर्णानन्द कुशल राजीतिज्ञ थे इनका जन्म सं 1890 में काशी के एक सम्‍भ्रांत कायस्‍थ में हुआ था |

सम्पूर्णानन्द भारतीय दर्शन के प्रकाण्‍ड विद्वान होने के साथ-साथ एक जागरूक शि‍क्षाविद्, गम्‍भीर, मर्मंज्ञ और उदात्त साहित्‍यकार के रूप में विख्‍ृयात हैं |

इनके पिता का नाम “विजयानंद” और माता का नाम “आनंदी देवी” था |

इन्होने वाराणसी से B.Sc की थी इसके बाद Lt की परीक्षाएं पास करने के ये टीचिंग करने लगे कुछ दिन तक हरिश्चंद्र हाई स्कूल और मिशन स्कूल में पढ़ाया।

इन्होने सबसे पहले प्रेम विधालय में पढ़ाया था इसके बाद डूंगर कॉलेज में प्रिंसपल के पद पर कार्य के बाद

इसके बाद 1921 राष्ट्रीय आंदोलन से प्रेरित होकर काशी में ज्ञानमण्डल में कार्य किया |
इन्होने हिंदी मासिक पत्रिका तथा ‘टुडे’अंग्रेजी दीनिक का सम्पादन किया कशी नगरी प्रचारणी सभा के अध्यक्ष तथा संरक्षक भी रहे |
वे समाजवादी विचारों के व्यक्ति थे और 1934 में कांग्रेस के अंदर ‘समाजवादी पार्टी’ के गठन में आचार्य नरेंद्र देव के साथ उनका भी प्रमुख हाथ था।
1955 में उत्तेर प्रदेह के मुख्य मंत्री तथा सं 1962 में राजस्थान के राजयपाल नियुक्त किये गए |

मृत्यु

डॉ सम्पूर्णानन्द अंतिम साँस तक अपने पद पर कार्यरत रहे “10 जनवरी 1969” को ये भगवान को प्यारे हो गए थे |

साहित्यिक योगदान

डॉ सम्पूर्णानन्द जी ने भारतीय दर्शन एवं धर्म के पुराने गूढ़ तत्वों को समझकर सुबोध शैली में उच्च कोटि के लेख लिखे |
सम्पूर्णानन्द जी भारतीय दर्शन और संस्कृति के प्रकांड विद्वान एवं हिंदी के महान ज्ञाता थे |

समाजवादी विचारधारा से प्रभावित थे |
इन्होने हिंदी ,राजनीती , इतिहास , भारतीय दर्शन , संस्कृति , ज्योतिष आदि विषयो पर उच्च कोटि के निबंध लिखे |

रचनाये:-

अंतर्राष्ट्रीय विधान

चीन की राज्य क्रांति

भारत के देशी राज्य

सम्राट हर्षवर्धन

मिश्र की राज्य क्रांति

चेतसिंह 

काशी का विद्रोह

महादाजी सिंधिया

महात्मा गांधी

आर्यों का आदि देश

सप्तर्षि मंडल

समाजवाद

चिद्विलास

ब्राह्मण सावधान

भाषा की शक्ति

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