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सूरदास का जीवन परिचय हिंदी में | Surdas Biography In Hindi

सूरदास का जीवन परिचय हिंदी में | Surdas Biography In Hindi

जन्म : Surdas Biography In Hindi

सूरदास का  जन्म 1478 में हुआ था लेकिन  कुछ का मानना है की उनका जन्म(Birth) 1479 में हुआ। लेकिन सूरदास के इतिहास को देखकर लगता है की उनका जन्म मथुरा (Mathura) के रुनकता ग्राम में हुआ था। जब वे किशोर थे तभी से उन्होंने कृष्ण भक्ति की शुरुवात कर दी थी। पारिवारिक अनदेखी की वजह से सूरदास जन्म से ही अंधे थे (Surdash Blind From Birth)। परिणामतः सूरदास ने 6 साल की आयु में ही घर छोड़ दिया। बाद में बे मथुरा के ही पास ब्रज में रहने लगे थे।

 सूरदास का नाम कृष्ण भक्ति की  धारा को प्रवाहित करने वाले भक्त कवियों में सबसे ऊपर है। हिंन्दी साहित्य में भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य उपासक और ब्रजभाषा के श्रेष्ठ कवि महात्मा सूरदास हिंदी साहित्य के सूर्य माने जाते हैं। हिंदी कविता कामिनी के इस कमनीय कांत ने हिंदी भाषा को समृद्ध करने में जो योगदान दिया है, वह अद्वितीय है। सूरदास हिंन्दी साहित्य में भक्ति काल के सगुण भक्ति शाखा के कृष्ण-भक्ति उपशाखा के महान कवि हैं।

    श्यामसुन्दरदास ने  लिखा है – “सूर वास्तव में जन्मान्ध नहीं थे, क्योंकि श्रृंगार तथा रंग-रुपादि का जो वर्णन उन्होंने किया है वैसा कोई जन्मान्ध नहीं कर सकता।”

डॉक्टर हजारीप्रसाद द्विवेदी ने लिखा है – “सूरसागर के कुछ पदों से यह ध्वनि अवश्य निकलती है कि सूरदास अपने को जन्म का अन्धा और कर्म का अभागा कहते हैं |

 वे अपनी कृति “सूरसागर” के लिये प्रसिद्ध है सूरदास की इस कृति में लगभग 100000 गीत है, जिनमे से आज केवल 8000 ही बचे है। उनके इन गीतों में कृष्ण के बचपन और उनकी लीला का वर्णन किया गया है। सूरदास कृष्ण भक्ति के साथ ही अपनी प्रसिद्ध कृति सूरसागर के लिये भी जाने जाते है। इतना ही नहीं सूरसागर के साथ उन्होंने सुर-सारावली और सहित्य-लहरी की भी रचना की है।

रचना :

सूरदास  वल्लभाचार्य के  शिष्य थे  इनका अपने गुरु वल्लभाचार्य के आठ शिष्यों में प्रमुख स्थान था।  सूरदास ने सवा लाख पदों की रचना की। इनके सभी पद रागनियों पर आधारित हैं। सूरदास जी द्वारा रचित कुल पांच ग्रन्थ उपलब्ध हुए हैं, जो निम्नलिखित हैं:-

    1. सूर सागर,

   2. सूर सारावली

  3. साहित्य लहरी

  4. नल दमयन्ती

   5. ब्याहलो

 इनमें से नल दमयन्ती और ब्याहलो की कोई भी प्राचीन प्रति नहीं मिली है। कुछ विद्वान तो केवल सूर सागर को ही प्रामाणिक रचना मानने के पक्ष में हैं।

 सूरदास की मृत्यु वर्ष 1580 ई में हुई थी। सूरदास का जीवन काल “वर्ष 1478 से वर्ष 1580 तक” यानी कुल 102 वर्ष का रहा था। अपने दिर्ध आयु जीवन काल में सूरदास ने कई ग्रंथ लिखे और काव्य पद की रचना की। सूरदास का जीवन कृष्ण भक्ति के लिए समर्पित था।

SUR DAS KE DOHE : 

DOHA 1  : 

” कहे कबीर कैसे निबाहे , केर बेर को संग
वह झूमत रस आपनी, उसके फाटत अंग  | ”

DOHA 2 :

” साँई इतना दीजिए जामें कुटुंब समाय ।
मैं भी भूखा ना रहूँ साधु न भुखा जाय॥ ”

DOHA 3 : 

” बोली एक अनमोल है, जो कोई बोलै जानि,
हिये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आनि। ”

” कहाॅं भयो तन बिछुरै, दुरि बसये जो बास
नैना ही अंतर परा, प्रान तुमहारे पास। ”

” नेह निबाहन कठिन है, सबसे निबहत नाहि
चढ़बो मोमे तुरंग पर, चलबो पाबक माहि। ”

” प्रेम पियाला सो पिये शीश दक्षिना देय
लोभी शीश ना दे सके, नाम प्रेम का लेय। ”

DOHA 4 :

खीरा सिर ते काटिये, मलियत नमक लगाय।
रहिमन करुये मुखन को, चहियत इहै सजाय

जे गरीब पर हित करैं, हे रहीम बड़ लोग।
कहा सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग ||

रहिमन देख बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि।
जहाँ काम आवै सुई, कहा करै तलवारि ||

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